का सरल उत्तर
सामान्य रूप से यह व्रत लगातार 16 गुरुवार तक किया जाता है और 17वें गुरुवार को इसका उद्यापन करना होता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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