का सरल उत्तर
हंस का 'नीर-क्षीर विवेक' (जल में मिले दूध को अलग करना) = साधक की वह विवेकी बुद्धि जो नश्वर-अनश्वर और सही-गलत के बीच भेद करे। हंस आध्यात्मिक पूर्णता और मोक्ष का भी प्रतीक है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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