का सरल उत्तर
माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए तप किया। सखी ने उन्हें वन में छुपाया (हरतालिका = हरण + सखी)। भाद्रपद शुक्ल तृतीया को उन्होंने रेत का शिवलिंग बनाकर जागरण किया और शिव ने प्रकट होकर उनकी कामना पूरी की। इसी घटना की स्मृति में यह व्रत होता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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