का सरल उत्तर
आचमन: दायीं हथेली (ब्रह्मतीर्थ) में जल लेकर तीन बार पान। 1. 'ॐ अमृतोपस्तरणमसि स्वाहा' (परमात्मा मेरे आधार), 2. 'ॐ अमृतापिधानमसि स्वाहा' (प्रभो! रक्षक हो), 3. 'ॐ सत्यं यशः श्रीर्मयि...' (सत्य-यश-लक्ष्मी निवास करें)।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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