का सरल उत्तर
समिधाधान: घी में डुबोई हुई तीन प्रादेश मात्र लंबी समिधाएं मंत्रों के साथ अग्नि में अर्पित करें। प्रथम: 'ॐ अयन्त इध्म आत्मा जातवेदस...' (अग्निदेव प्रदीप्त हों, हमें प्रजा-पशुधन-ज्ञान से समृद्ध करें)। प्रत्येक आहुति के अंत में 'इदन्न मम' बोलें।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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