का सरल उत्तर
इंद्रास्त्र गुरु-शिष्य परंपरा से या देवराज इंद्र की तपस्या करके धर्म के कार्यों के पुरस्कार के रूप में प्राप्त किया जाता था।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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