का सरल उत्तर
जनेऊ धारण करते समय 'यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं प्रजापतेर्यत्सहजं पुरस्तात्। आयुष्यमग्र्यं प्रतिमुञ्च शुभ्रं यज्ञोपवीतं बलमस्तु तेजः॥' मंत्र पढ़ा जाता है, जिसका अर्थ है — यह परम पवित्र और आयुवर्धक यज्ञसूत्र मैं धारण करता हूँ, इससे मुझे बल और तेज मिले।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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