का सरल उत्तर
पूजा(भक्ति)>उपचार(ज्योतिष)। गीता: ईश्वर शरण=सर्वपापमुक्ति=ग्रह से परे। पर दोनों पूरक। भक्ति+कर्म+उपचार=पूर्ण। सच्ची भक्ति=सर्वोपरि।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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