विस्तृत उत्तर
दोनों = पूरक, प्रतिस्पर्धी नहीं।
उपचार (ज्योतिषीय): रत्न, दान, मंत्र, हवन, व्रत = ग्रह ऊर्जा संतुलित। लक्ष्य = ग्रह दोष शमन।
पूजा (भक्ति): ईश्वर आराधना, स्तोत्र, कथा, मंदिर = ईश्वर कृपा। लक्ष्य = दैवीय सहायता + आत्मिक शांति।
कौन अधिक: पूजा (भक्ति) > ज्योतिषीय उपचार — शास्त्रीय मत।
गीता (18.66): *'सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज, अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि'* = ईश्वर शरण = सर्व पापमुक्ति = ग्रह दोष से भी परे।
व्यावहारिक: सच्ची भक्ति = सर्वोपरि। पर ज्योतिषीय उपचार = सहायक + व्यावहारिक। दोनों साथ = सर्वोत्तम। भक्ति + कर्म + उपचार = पूर्ण समाधान।




