विस्तृत उत्तर
मंत्र > रत्न — अधिकांश शास्त्रीय विद्वानों का मत।
मंत्र श्रेष्ठ क्यों
- ▸मंत्र = आंतरिक शक्ति जागरण — स्वयं की ऊर्जा + ईश्वर कृपा।
- ▸मंत्र = निःशुल्क — कोई भी, कभी भी, कहीं भी।
- ▸मंत्र = शुद्ध भक्ति — गीता: भक्ति सर्वोपरि।
- ▸मंत्र = शरीर+मन+आत्मा तीनों पर प्रभाव।
रत्न की सीमा
- ▸रत्न = बाहरी वस्तु — शरीर पर ग्रह ऊर्जा प्रवाहित।
- ▸रत्न = महँगा — हर कोई नहीं पहन सकता।
- ▸गलत रत्न = हानि — मंत्र में यह खतरा नगण्य।
सबसे प्रभावी: मंत्र + दान + सेवा + कर्म शुद्धि > रत्न अकेला।
व्यावहारिक: जो रत्न खरीद सकें + ज्योतिषी सलाह = रत्न+मंत्र दोनों। न खरीद सकें = मंत्र अकेला पर्याप्त। भगवान को पत्थर नहीं, भाव चाहिए।





