विस्तृत उत्तर
सीधा उत्तर: नहीं — रत्न ग्रह दोष पूरी तरह ठीक नहीं करता।
रत्न = सहायक उपाय, पूर्ण समाधान नहीं। रत्न शुभ ग्रह को मजबूत करता है — अशुभ ग्रह को शांत करने में सीमित। गलत रत्न = हानि भी।
रत्न क्या करता है: शुभ ग्रह की ऊर्जा बढ़ाता, ग्रह का सकारात्मक प्रभाव तीव्र, शरीर+मन पर ग्रह अनुकूल प्रभाव।
रत्न क्या नहीं करता: अशुभ ग्रह को पूरा शांत नहीं, कर्म दोष नहीं मिटाता, 100% गारंटी नहीं।
सम्पूर्ण ग्रह शांति = रत्न + मंत्र + दान + सेवा + हवन + कर्म शुद्धि — सब मिलकर। केवल रत्न = आंशिक।
गीता (18.66): *'सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज'* — अंततः ईश्वर शरण + कर्म = सर्वोपरि।





