विस्तृत उत्तर
अतल लोक के भवन, महल और प्रांगण अत्यंत भव्य तथा बहुमूल्य रत्नों और मणियों से निर्मित हैं जिनका निर्माण स्वयं मय दानव और विश्वकर्मा ने किया है। मय दानव राक्षसों और दैत्यों का सबसे बड़ा वास्तुकार और मायावी शिल्पी है। यहाँ के भवन पृथ्वी के किसी भी भवन से अधिक भव्य और सुंदर हैं। शिव पुराण के पाताल वर्णन के अनुसार यहाँ के निवासी अत्यंत दिव्य और सुगंधित लेप और स्वर्ण के आभूषण धारण करते हैं। देवर्षि नारद ने पाताल लोकों का भ्रमण करके स्वर्ग की देव-सभा में उद्घोष किया था कि पाताल लोक का सौंदर्य और ऐश्वर्य इंद्र के स्वर्ग से भी कहीं अधिक आनंददायक और श्रेष्ठ है।
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