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विस्तृत उत्तर
पाताल लोकों में दानवराज मयासुर ने अपनी अद्भुत मायावी वास्तुकला से रत्नों, सोने और स्फटिक के महलों, मंदिरों, प्रांगणों और अतिथि-गृहों का निर्माण किया है। इन बिल-स्वर्गों में स्वर्ग से भी अधिक काम-भोग, ऐश्वर्य, आनंद और विभूति उपलब्ध है। यहाँ के भवन, उद्यान और क्रीड़ा-स्थल अत्यंत समृद्ध हैं। मार्कण्डेय पुराण के प्रसंग में भी पाताल में एक विशाल और अद्भुत स्वर्ण नगरी का वर्णन मिलता है, जो स्वर्णिम प्राचीरों से घिरी हुई थी।
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