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ध्यान📜 पतञ्जलि योगसूत्र, भगवद्गीता, व्यास भाष्य2 मिनट पठन

ध्यान और योग में क्या अंतर है?

संक्षिप्त उत्तर

योग = संपूर्ण अष्टांग पद्धति (यम-नियम-आसन-प्राणायाम-प्रत्याहार-धारणा-ध्यान-समाधि)। ध्यान = योग का 7वाँ अंग। ध्यान = एक विषय पर अखंड एकाग्रता। योग = चित्त वृत्ति निरोध (पतञ्जलि)। ध्यान, योग का सबसे महत्त्वपूर्ण अभ्यास है।

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विस्तृत उत्तर

ध्यान और योग में संबंध अंग-अंगी का है — ध्यान, योग का एक अंग है।

पतञ्जलि योगसूत्र के अनुसार

पतञ्जलि ने अष्टांग योग में योग को 8 अंगों में विभाजित किया है:

  1. 1यम, 2. नियम, 3. आसन, 4. प्राणायाम, 5. प्रत्याहार, 6. धारणा, 7. ध्यान, 8. समाधि

ध्यान इस क्रम का सातवाँ अंग है।

मुख्य अंतर

| विषय | योग | ध्यान |

|------|-----|-------|

| परिभाषा | चित्त वृत्तियों का निरोध (यो.सू. 1.2) | एक विषय पर अखंड एकाग्रता (यो.सू. 3.2) |

| व्यापकता | संपूर्ण जीवनशैली | एक विशिष्ट अभ्यास |

| अंग | 8 अंग | योग का 7वाँ अंग |

| लक्ष्य | मोक्ष/कैवल्य | मन की स्थिरता → समाधि |

भगवद्गीता (6.19): 'यथा दीपो निवातस्थो नेंगते सोपमा स्मृता। योगिनो यतचित्तस्य युञ्जतो योगमात्मनः।' — ध्यानी का मन निर्वात दीपक की लौ जैसा स्थिर रहता है।

सरल शब्दों में: योग एक विस्तृत आध्यात्मिक विज्ञान है; ध्यान उसका सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण अभ्यास है।

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शास्त्रीय स्रोत
पतञ्जलि योगसूत्र, भगवद्गीता, व्यास भाष्य
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