विस्तृत उत्तर
पुराणों में इन तीनों की तुलना एक सरल उत्तर में नहीं बताई गई है — क्योंकि ये तीनों अलग-अलग प्रयोजन, स्तर और देवताओं के अस्त्र हैं।
त्रिशूल — शिव का नित्य शस्त्र। इससे शिव को छोड़कर कोई भी देव-दानव नहीं बच सकता। यह भौतिक और आध्यात्मिक दोनों स्तरों पर संहार करता है।
सुदर्शन चक्र — विष्णु का अमोघ अस्त्र। यह धर्म-रक्षा के लिए है — अधर्मी को खोजकर नष्ट करता है। इसे चलाने वाले के पास ही लौटता है। इसे रोका नहीं जा सकता।
ब्रह्मास्त्र — ब्रह्मा का अमोघ अस्त्र। जहाँ प्रयोग हो वहाँ 12 वर्ष दुर्भिक्ष। दो ब्रह्मास्त्र टकरा जाएं तो प्रलय।
पाशुपतास्त्र की श्रेष्ठता — यदि इन सबमें से एक को सर्वश्रेष्ठ चुनना हो तो पाशुपतास्त्र सर्वोच्च माना गया है — क्योंकि यह अकाट्य है और ब्रह्मास्त्र भी इसे नहीं रोक सकता।
संक्षेप में — तीनों अपने-अपने क्षेत्र में अद्वितीय हैं। त्रिशूल = शिव का नित्य शस्त्र, सुदर्शन = विष्णु की धर्म-रक्षा शक्ति, ब्रह्मास्त्र = ब्रह्मा की सृष्टि-संहार शक्ति।





