कलाप उपवन में पितर क्या बात कर रहे थे?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
कलाप उपवन में पितृगण आपस में वार्तालाप कर रहे थे और अपेक्षा कर रहे थे कि उनके वंश में कोई सन्मार्गशील और धर्मपरायण व्यक्ति उत्पन्न हो जो गया तीर्थ में पिण्डदान करे, पितृ पक्ष की त्रयोदशी या प्रतिपदा को मधु-घृत युक्त पायस का दान करे, वृषोत्सर्ग नीला वृषभ छोड़े, और ब्राह्मणों को दक्षिणा सहित संतुष्ट करे। महाराज पुरुरवा ने ये सब अपेक्षाएँ पूरी कीं।
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पौराणिक कथा
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