का सरल उत्तर
देवी भागवत: बाह्य शुद्धि (स्नान) + आभ्यंतर शुद्धि (मानसिक पवित्रता) अनिवार्य। आचमन: 'ॐ केशवाय स्वाहा, ॐ नारायणाय स्वाहा, ॐ माधवाय स्वाहा' — तीन बार जल ग्रहण (त्रिविध ताप शांति)। इसके बाद प्राणायाम से मन एकाग्र करें।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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