का सरल उत्तर
कालभैरव रात्रिकालीन देवता हैं, इसलिए यह व्रत उस दिन किया जाता है जब अष्टमी तिथि सूर्यास्त के बाद और मध्यरात्रि (निशीथ काल) में मौजूद हो।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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