का सरल उत्तर
भगवद्गीता के अनुसार शत्रु-नाश या स्वार्थ के लिए तामसिक प्रयोग करने वाले 'आसुरी-निष्ठा' वाले कहलाते हैं और उनका पतन निश्चित है — ये प्रयोग आम साधकों के लिए सर्वथा निषिद्ध हैं।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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