का सरल उत्तर
कर्मकांडी स्वर्लोक को अंतिम लक्ष्य मानते हैं। ब्रह्मज्ञानी और भक्त इसे अस्थायी मानते हैं और सीधे मोक्ष चाहते हैं। भागवत कहता है — शुद्ध भक्त स्वर्लोक की कामना नहीं करते।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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