का सरल उत्तर
कर्ण का कवच-कुंडल जन्म से ही शरीर पर था — सूर्यदेव का दिव्य वरदान। यह शरीर का अभिन्न अंग था, अभेद्य था, और कोई भी अस्त्र इसे नहीं भेद सकता था। जब तक था — कर्ण अजेय थे।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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