का सरल उत्तर
हाँ, अशुद्ध संस्कृत पढ़ने से बेहतर है कि भक्त शुद्ध भाव के साथ हिंदी में कवच का पाठ करे।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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