का सरल उत्तर
केनोपनिषद: देवताओं को अहंकार हुआ कि विजय उनके बल से। परब्रह्म यक्ष रूप में प्रकट — अग्नि तिनका न जला सके, वायु उड़ा न सके, इंद्र का अहंकार टूटा। तब 'उमा हैमवती' प्रकट हुईं और बताया: 'सब शक्ति ब्रह्म की है।' वे 'ब्रह्म-विद्या' का स्वरूप हैं।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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