का सरल उत्तर
कीर्तन में भगवान के नाम, गुण, लीला और महिमा का प्रेमपूर्वक मुखर गायन किया जाता है — मृदंग-करताल के साथ। यह समूह साधना है जिसमें भाव-विभोर होकर नृत्य भी होता है। गीता 9.14 में 'सततं कीर्तयन्तो मां' — निरंतर कीर्तन को सर्वश्रेष्ठ भक्ति कहा गया है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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