का सरल उत्तर
कीर्तन में नाचने से तन-मन-वाणी तीनों समर्पित होते हैं, अहंकार टूटता है और भीतर का आनंद बाहर प्रकट होता है — यही भक्ति की गहराई है। मीरा और चैतन्य दोनों के जीवन में यह स्पष्ट है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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