का सरल उत्तर
'कुरु कुरु' क्रियात्मक आग्रह है जिसका अर्थ है 'शीघ्रता से करो' — यह भैरव को संकट निवारण हेतु तुरंत क्रियाशील होने का निर्देश देता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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