का सरल उत्तर
न्याय-दर्शन में तर्क है — सुव्यवस्थित विश्व का एक कारण (ईश्वर) होना चाहिए। वेदांत कहता है — ईश्वर बाहर नहीं, सब में व्याप्त है। व्यक्तिगत अनुभव और भक्ति स्वयं एक प्रमाण है। यह प्रश्न हिंदू दर्शन में खुला और जिज्ञासापूर्ण रहा है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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