का सरल उत्तर
हाँ, मंत्र जप से कर्म नष्ट होते हैं। गीता 4.37: 'ज्ञान की अग्नि सभी कर्म भस्म करती है।' भागवत: 'नाम स्मरण से सभी पाप नाश।' संचित कर्म — जप से क्षय; प्रारब्ध — सहने की शक्ति; आगामी — शुभ संस्कार। शर्त: सच्चे मन से + जीवन में परिवर्तन।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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