का सरल उत्तर
नहीं, वैष्णवास्त्र का वार कभी खाली नहीं जाता था। यह अचूक अस्त्र था जो लक्ष्य को अवश्य भेदता था।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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