का सरल उत्तर
लिंगायत प्रत्येक व्यक्ति गले में इष्टलिंग धारण करते हैं और प्रतिदिन उसकी अंग-पूजन करते हैं। मंदिर की आवश्यकता नहीं — स्वयं का शरीर ही शिव-मंदिर है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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