महाभारत में धर्म का सबसे बड़ा पाठ
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
'धर्मस्य सूक्ष्मा गतिः' — धर्म जटिल; सही-गलत सदैव स्पष्ट नहीं। गीता 2.47 (निष्काम कर्म), 'यतो धर्मस्ततो जयः' (धर्म विजय), 18.66 (शरणागति)। अन्याय सहना भी अधर्म।
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