विस्तृत उत्तर
महाभारत = 'धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे' — धर्म का महाकाव्य। सबसे बड़ा पाठ:
1धर्म जटिल है (सबसे बड़ा पाठ)
धर्मस्य सूक्ष्मा गतिः' = धर्म की गति सूक्ष्म। सही-गलत = सदैव स्पष्ट नहीं। भीष्म, द्रोण, कर्ण = धार्मिक पर गलत पक्ष। युधिष्ठिर = धर्मराज पर झूठ बोला ('अश्वत्थामा हतः')।
2कर्म करो, फल ईश्वर पर (गीता 2.47)
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन' = निष्काम कर्म।
3अधर्म का विनाश निश्चित
यतो धर्मस्ततो जयः' = जहां धर्म, वहां विजय। 100 कौरव vs 5 पांडव = धर्म जीता।
4शरणागति
गीता 18.66 = 'मामेकं शरणं व्रज' — ईश्वर शरणागति = सर्वोच्च धर्म।
5अन्याय का प्रतिकार
द्रौपदी चीरहरण = अन्याय; मौन = अधर्म। अन्याय सहना भी अधर्म।
सार: धर्म = कठिन चुनाव; निष्काम कर्म + ईश्वर शरणागति + अन्याय प्रतिकार = महाभारत शिक्षा।





