का सरल उत्तर
महामृत्युंजय अनुष्ठान में कोई जाति या लिंग भेद नहीं — पीड़ित, परिजन या सुयोग्य ब्राह्मण कर सकते हैं। यदि रोगी कोमा में हो तो कोई अन्य उसके नाम-गोत्र से संकल्प लेकर पुण्य उसके खाते में दे सकता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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