का सरल उत्तर
महाराज पुरुरवा एक चन्द्रवंशी सम्राट थे, जो अत्यंत धर्मपरायण और विष्णु भक्त थे। विष्णु पुराण के तृतीय अंश में उनका प्रसंग वर्णित है। उन्होंने अपने पितरों की आकांक्षा को पूर्ण कर विधिपूर्वक श्राद्ध संपन्न कर उन्हें परम तृप्ति प्रदान की, और परिणामस्वरूप पितरों के आशीर्वाद से अकूत ऐश्वर्य, धर्म और अंततः मोक्ष प्राप्त किया।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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