महर्लोक को भौतिक और आध्यात्मिक जगत के बीच 'विभाजक रेखा' क्यों कहते हैं?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
महर्लोक विभाजक रेखा इसलिए है क्योंकि एक तरफ विनाशी त्रैलोक्य (भोग का जगत) है और दूसरी तरफ नित्य अविनाशी जनलोक-सत्यलोक (मुक्ति का जगत) है। महर्लोक दोनों के बीच कृतकाकृतक सेतु है।
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