का सरल उत्तर
पाराशर जी के अनुसार: 1. जब चौथे भाव का स्वामी और देवगुरु बृहस्पति आपस में केंद्र में हों और लग्नेश मजबूत हो। या 2. जब चौथा स्वामी अपनी उच्च/स्वराशि में 10वें स्वामी के साथ बैठा हो।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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