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विस्तृत उत्तर
बृहत् पाराशर होरा शास्त्र' के अनुसार इस योग के निर्माण की दो स्थितियां हैं। पहली स्थिति: यदि चतुर्थ भाव का स्वामी (सुखेश) और देवगुरु बृहस्पति परस्पर केंद्र में हों (एक-दूसरे से 1, 4, 7, 10वें स्थान पर) और लग्नेश बलयुक्त हो। दूसरी स्थिति: यदि चतुर्थ भाव का स्वामी अपनी स्वराशि या उच्च राशि में स्थित होकर दशम भाव के स्वामी (कर्मेश) के साथ युति (Conjunction) कर रहा हो, तब भी कहल योग बनता है।
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