विस्तृत उत्तर
आचार्य मन्त्रेश्वर कृत 'फलदीपिका' में कहल योग का 'डिस्पोजिटर' (अधिपति) आधारित रूप बताया गया है। इसके अनुसार, जन्म कुंडली में लग्न का स्वामी जिस राशि में बैठा है, उस राशि का स्वामी (Dispositor of Lagna Lord) यदि अपनी स्वराशि या उच्च राशि में होकर किसी केंद्र (1, 4, 7, 10) या त्रिकोण (1, 5, 9) भाव में बैठा हो, तो यह कहल योग कहलाता है।





