विस्तृत उत्तर
आचार्य वैद्यनाथ दीक्षित रचित 'जातक पारिजात' के अनुसार, जब जन्म कुंडली में चतुर्थेश (4th Lord) और नवमेश (9th Lord) एक-दूसरे से परस्पर केंद्र में स्थित हों (Mutual Kendras) और लग्न का स्वामी (लग्नेश) बलयुक्त हो, तो यह एक पूर्ण और शुद्ध कहल योग माना जाता है। आधुनिक ज्योतिष में यह नियम सर्वाधिक मान्य और बहुतायत में प्रयोग किया जाने वाला सिद्धांत है।





