का सरल उत्तर
उनकी कुंडली में शुद्ध धर्म-कर्माधिपति योग नहीं था, लेकिन लग्न में शुक्र, मंगल और बुध की युति से एक दूसरा बहुत शक्तिशाली 'केन्द्र-त्रिकोण राजयोग' बन रहा था।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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