का सरल उत्तर
देवी की प्रलयंकारी गर्जना → महिषासुर सेना पर आक्रमण → देवी ने त्रिशूल-गदा से संहार → महिषासुर अनेक रूप बदलता रहा → देवी ने सुरापान किया → छाती पर पैर रखा → भैंसे के मुख से आधा बाहर निकलते ही खड्ग से मस्तक काटा → 'महिषासुरमर्दिनी' नाम।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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