महोदरेश्वर लिंग के क्षेत्र में 'अन्नदान' का क्या तांत्रिक और धर्मशास्त्रीय महत्त्व है?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
यहाँ अन्नदान उग्र शिव-गणों की 'भूत-शुद्धि' और तृप्ति करता है। भूखे संन्यासी की तृप्ति की तरंगें दानकर्ता के कर्म-बंधनों और प्रारब्ध को भस्म कर देती हैं। यह दान पूर्णतः गुप्त होना चाहिए।
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