का सरल उत्तर
यहाँ अन्नदान उग्र शिव-गणों की 'भूत-शुद्धि' और तृप्ति करता है। भूखे संन्यासी की तृप्ति की तरंगें दानकर्ता के कर्म-बंधनों और प्रारब्ध को भस्म कर देती हैं। यह दान पूर्णतः गुप्त होना चाहिए।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।