का सरल उत्तर
मैत्राक्षज्योतिक धर्म से च्युत वैश्य की प्रेत योनि है, जो छल-कपट और अनुचित धन संचय का फल है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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