का सरल उत्तर
आदित्यहृदय स्तोत्र/सूर्याष्टक/सूर्य सहस्रनाम = पूजा के ध्यान चरण में पाठ। कारण: सूर्य = प्रत्यक्ष देवता, 'ब्रह्म' का दृष्टिगोचर स्वरूप (असावादित्यो ब्रह्मा)। ये स्तोत्र इस प्रत्यक्ष देव की स्तुति का सर्वश्रेष्ठ माध्यम हैं।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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