विस्तृत उत्तर
सूर्य अर्घ्य के पश्चात् घर के पूजा स्थल में भगवान सूर्य की पूजा आरंभ करते समय 'आदित्यहृदय स्तोत्र', 'सूर्याष्टक' या 'सूर्य सहस्रनाम' का पाठ करते हुए भगवान का ध्यान किया जाता है।
सनातन धर्म में सूर्य को प्रत्यक्ष देवता माना गया है जो 'ब्रह्म' का भौतिक और दृष्टिगोचर स्वरूप हैं (असावादित्यो ब्रह्मा)। आदित्यहृदय स्तोत्र इस प्रत्यक्ष देव की स्तुति का सर्वश्रेष्ठ माध्यम है।
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