विस्तृत उत्तर
प्राण-प्रतिष्ठा के द्वारा शिवलिंग में भगवान के जाग्रत हो जाने के पश्चात् उनकी प्रथम पूजा की जाती है।
यह पूजा एक अतिथि-सत्कार के भाव से की जाती है, मानो कोई चक्रवर्ती सम्राट हमारे घर पधारे हों।
इस पूजा को षोडशोपचार पूजा अर्थात् सोलह उपचारों से की जाने वाली पूजा कहते हैं।





