विस्तृत उत्तर
सूर्यास्त से लगभग 1 घंटा पूर्व पुनः स्नान करें। घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) को लीप कर गाय के गोबर से मंडप बनाएं और 5 रंगों से अष्टदल कमल बनाएं। कुशा के आसन पर उत्तर या पूर्व की ओर मुख करके शिवलिंग स्थापित करें। पाद्य, अर्घ्य, आचमन के बाद रुद्राभिषेक करें। फिर मौली, जनेऊ, श्वेत चंदन और भस्म (विभूति) लगाएं। मदार, धतूरा, कनेर और अपराजिता के फूल चढ़ाएं। चिकना भाग नीचे करके तीन पत्तियों वाला बिल्व पत्र अनिवार्य रूप से अर्पित करें। अंत में गुग्गल की धूप और गाय के घी का दीपक जलाकर आरती करें।





