का सरल उत्तर
दिव्यास्त्र के लिए देव-संबंधित मंत्र का विधिपूर्वक उच्चारण करते हुए बाण धनुष पर चढ़ाया जाता था। मंत्र से देवता की शक्ति अस्त्र में समाती थी। यह विद्या गोपनीय और गुरु-परंपरा से मिलती थी।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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