का सरल उत्तर
मानसिक जप = सदैव अनुमत (सर्वसम्मत)। माला जप = कुछ में वर्जित। श्रवण = अनुमत। भगवान भाव देखते हैं — मन में ईश्वर स्मरण कभी वर्जित नहीं, किसी भी अवस्था में।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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