का सरल उत्तर
मातामह श्राद्ध = नाना-नानी (माता के माता-पिता) का श्राद्ध, जो दौहित्र (पुत्री का पुत्र = नाती) द्वारा किया जाता है। इसे 'दौहित्र श्राद्ध' भी कहते हैं। पितृ पक्ष की प्रतिपदा तिथि इसके लिए सर्वोत्कृष्ट है। यह मातृकुल के प्रति कृतज्ञता का शास्त्रीय विधान है।
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